अमेरिका का बड़ा झटका: TCS, Infosys, Wipro समेत 8 दिग्गज कंपनियां ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से बाहर — लाखों भारतीयों पर संकट

विदेश में काम करने का सपना देखने वाले लाखों भारतीय IT पेशेवरों के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। अमेरिका के श्रम विभाग ने 8 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि TCS, Infosys, Wipro, HCL, Microsoft, Adobe, Cognizant और Capgemini जैसी दिग्गज कंपनियों को Permanent Labour Certification (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया गया है। यह घोषणा अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ मिलकर की।

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यह फैसला अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारतीयों, के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इन कंपनियों के नए या लंबित PERM आवेदन अब आगे प्रोसेस नहीं किए जाएंगे।

क्या है PERM प्रोग्राम?

PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला चरण है। अमेरिका में काम करने वाला कोई भी विदेशी कर्मचारी, जो ग्रीन कार्ड के जरिए स्थायी निवासी बनना चाहता है, सबसे पहले इस प्रक्रिया से गुजरता है। इसमें नियोक्ता कंपनी को यह साबित करना होता है कि उस पद के लिए कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है।

सस्पेंशन के पीछे क्या कारण बताए गए?

अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, इन कंपनियों को वीजा प्रणाली में धोखाधड़ी और दुरुपयोग के आरोपों के चलते सस्पेंड किया गया है। श्रम सचिव सॉन्डरलिंग के मुताबिक, इन फर्मों ने 2009 से अब तक करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों की मांग की है और 2,30,000 से अधिक H-1B स्वीकृतियां तथा 1,00,000 से अधिक लेबर सर्टिफिकेशन हासिल किए हैं। प्रशासन का आरोप है कि इन कंपनियों ने सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर अमेरिकी श्रमिकों के अवसर छीने हैं।

किस पर असर नहीं पड़ेगा?

राहत की बात यह है कि Meta, Amazon और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर यह रोक नहीं लगाई गई है। इसके अलावा, मौजूदा H-1B स्टेटस धारकों या जिनके आवेदन पहले से स्वीकृत हो चुके हैं, उन्हें रद्द नहीं किया जाएगा। यानी पहले से अमेरिका में काम कर रहे पेशेवरों की नौकरी या वीजा इस फैसले से सीधे प्रभावित नहीं होगा।

TCS की प्रतिक्रिया

इस फैसले पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं, अन्य प्रभावित कंपनियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उद्योग जगत के विशेषज्ञ इस फैसले को ट्रंप प्रशासन की कड़ी आव्रजन नीति का हिस्सा मान रहे हैं।

भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए क्या मतलब है?

भारतीय IT पेशेवर अमेरिका के H-1B और ग्रीन कार्ड सिस्टम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। हर साल हजारों भारतीय इन आठों कंपनियों के जरिए अमेरिका जाते हैं या ग्रीन कार्ड की कतार में होते हैं। PERM से सस्पेंशन का मतलब है कि इन कंपनियों के माध्यम से ग्रीन कार्ड का सपना फिलहाल अधर में लटक जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इससे H-1B पर अमेरिका में काम जारी रहेगा, लेकिन स्थायी निवास की राह और लंबी हो सकती है।

आगे क्या हो सकता है?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावित कंपनियां इस फैसले को अमेरिकी अदालतों में चुनौती दे सकती हैं या श्रम विभाग से पुनर्विचार की अपील कर सकती हैं। विदेश में करियर बनाने की योजना बना रहे भारतीय युवाओं को सलाह दी जा रही है कि वे इमिग्रेशन विशेषज्ञों से परामर्श लें और अपने विकल्पों की समीक्षा करें। आने वाले हफ्तों में इस मामले पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

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