बिहार में सड़क हादसे में घायल होने वालों के लिए PM Rahat Yojana बड़ी राहत बनकर आई है। इस योजना के तहत हादसे के बाद पहले सात दिनों तक ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलता है। यह सुविधा आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध 1,268 सरकारी और निजी अस्पतालों में उपलब्ध है। परिवहन विभाग के अनुसार अब तक करीब 250 हादसा पीड़ित इस योजना के तहत इलाज पा चुके हैं।
PM Rahat Yojana क्या है
सड़क हादसे के बाद सबसे बड़ी दिक्कत इलाज के खर्च की होती है। कई बार परिवार पैसे की चिंता में अस्पताल पहुंचने में देर कर देता है, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है। PM Rahat Yojana का मकसद यही है कि पैसों की कमी इलाज में रुकावट न बने। सूचीबद्ध अस्पतालों में पीड़ित को पहले सात दिनों तक ₹1.5 लाख तक का इलाज बिना नकद भुगतान के मिल सकेगा। यह योजना शर्तों के अधीन लागू है, इसलिए अस्पताल में भर्ती के समय योजना की पात्रता और प्रक्रिया की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
बिहार में जागरूकता अभियान तेज
परिवहन सचिव राज कुमार ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को योजना का प्रचार-प्रसार बढ़ाने का निर्देश दिया है। जिलों में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें आम लोग, अस्पताल प्रबंधन, सरकारी विभाग और अन्य हितधारक शामिल होंगे। अधिकारियों को स्वास्थ्य विभाग और सूचीबद्ध अस्पतालों के साथ तालमेल बनाकर योजना को जमीन पर उतारने को कहा गया है।
अस्पतालों में लगेंगे होर्डिंग और फ्लेक्स
सदर अस्पतालों और सभी आयुष्मान भारत सूचीबद्ध अस्पतालों में योजना की जानकारी वाले होर्डिंग और फ्लेक्स बैनर लगाए जाएंगे। इन पर कैशलेस इलाज की सीमा, कवर की अवधि और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। मकसद यह है कि हादसे के पीड़ित और उनके परिजनों को जरूरत के समय सही जानकारी तुरंत मिल जाए। जिला अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जानकारी सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि अस्पतालों में दिखाई भी दे।
गोल्डन ऑवर क्यों है सबसे अहम
राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसान ने हादसे के बाद के पहले घंटे को गोल्डन ऑवर बताया है। इस दौरान तुरंत चिकित्सा मदद मिलने से गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए योजना का जोर सिर्फ इलाज के खर्च पर नहीं, बल्कि समय पर इलाज तक पहुंच पर भी है। जिला स्तर पर कार्यशालाओं और अस्पतालों में जानकारी उपलब्ध होने से परिजनों को यह पता रहेगा कि हादसे के बाद कहां और कैसे मदद मिलेगी।
पीड़ित परिवारों को क्या करना चाहिए
हादसे के बाद सबसे पहले घायल को नजदीकी सूचीबद्ध अस्पताल पहुंचाएं। अस्पताल में PM Rahat Yojana के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा के बारे में पूछें और जरूरी दस्तावेज साथ रखें। यदि अस्पताल योजना की जानकारी देने में आनाकानी करे तो जिला परिवहन अधिकारी या जिला प्रशासन से संपर्क किया जा सकता है। योजना की जानकारी पहले से जानना ही सबसे बड़ा बचाव है, क्योंकि हादसे के समय जानकारी खोजने का वक्त नहीं मिलता।
जागरूकता ही सबसे बड़ा इलाज है
इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हादसे के पीड़ितों को इसके बारे में पता ही नहीं होता। हादसे के बाद परिजन घबराहट में अस्पताल भागते हैं और इलाज के खर्च की चिंता में उलझ जाते हैं। यदि उन्हें पहले से पता हो कि सूचीबद्ध अस्पताल में सात दिनों तक ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है, तो वे बिना देर किए सही अस्पताल पहुंच सकते हैं। इसीलिए परिवहन विभाग ने जिला स्तर पर कार्यशालाओं और अस्पतालों में होर्डिंग लगाने का फैसला किया है। जिला परिवहन अधिकारी, जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर यह सुनिश्चित करना है कि जानकारी हर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचे। आम लोगों को भी चाहिए कि वे अपने परिवार में इस योजना की जानकारी साझा करें, ताकि जरूरत पड़ने पर कोई परिवार पैसे की कमी के कारण इलाज से वंचित न रह जाए। सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि हादसे से बचना ही सबसे अच्छा इलाज है।
आपातकालीन और स्वास्थ्य योजनाओं पर और पढ़ें: Cyclone Arnab: आंध्र तट पर लैंडफॉल और ओडिशा में रेड अलर्ट और SBI Personal Loan 2026 की पूरी जानकारी।

Bhudev Bhagaliya is an experienced and senior journalist who has carved a distinct niche for himself in the world of Hindi journalism through his profound understanding and precise writing style. With over two decades of experience in the field of journalism, he has held key responsibilities at Dainik Hindustan for 12 years and at Amar Ujala for one year. Currently, he serves as the Content Editor for the Jagrook Youth News newspaper and portal, where he plays a crucial role in ensuring the quality and credibility of the news content. Bhudev Bhagaliya consistently writes about issues that help raise awareness within society and among the younger generation.