भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने गुरुवार 15 अक्टूबर को बड़ा फैसला लेते हुए 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट की विशेष समीक्षा (Special Summary Revision – SSR) का आदेश दिया है। यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत की जाएगी और इसके लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता की तारीख (qualifying date) तय की गई है। आयोग का कहना है कि इसका मकसद सभी पात्र नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करना और गलत प्रविष्टियों को सुधारना है।
किन राज्यों में होगा वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण
चुनाव आयोग के आदेश में 14 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल। इन राज्यों में करीब 50 करोड़ से अधिक मतदाता इस प्रक्रिया से प्रभावित होंगे।
उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में 2027 (फरवरी तक) विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए इन राज्यों में वोटर लिस्ट की शुद्धता और अहम हो गई है।
पूरी टाइमलाइन: कब-क्या होगा
चुनाव आयोग ने विशेष समीक्षा की पूरी समय-सारणी भी जारी कर दी है। इसके मुताबिक मतदान केंद्रों का युक्तिकरण और पुनर्व्यवस्था 2 नवंबर 2026 तक पूरी होगी। एकीकृत मसौदा (draft) वोटर लिस्ट 12 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी। 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक नागरिक दावे और आपत्तियां (claims and objections) दर्ज करा सकेंगे। सभी दावों-आपत्तियों का निपटारा 28 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा और अंतिम वोटर लिस्ट 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित होगी।
इस प्रक्रिया के दौरान युवा मतदाताओं को जोड़ने, डुप्लिकेट प्रविष्टियों की पहचान करने और मृत मतदाताओं के नाम हटाने का काम भी पूरा किया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जहां SIR अभी चल रहा है या हाल में पूरा हुआ है (दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश), वहां SSR समय-सारणी अलग से घोषित होगी; हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए मौसम को ध्यान में रखकर अलग शेड्यूल जारी होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला: SIR विवाद की पृष्ठभूमि
चुनाव आयोग का यह फैसला वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान योग्य मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, जिसे विपक्ष ने “वोट चोरी” का नाम दिया है। विपक्षी INDIA गठबंधन के नेता इस मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
इसी बीच 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं के नाम हटाने में कथित अनियमितताओं को लेकर दाखिल याचिकाओं पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अदालत ने आयोग से जवाब मांगा है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि विपक्ष के ये आरोप अभी न्यायालय द्वारा तय नहीं किए गए हैं और मामला विचाराधीन है। आयोग ने अपनी ओर से कहा है कि SIR में ड्राफ्ट लिस्ट से नाम का अनुपस्थित होना तकनीकी रूप से नाम हटाना नहीं है, क्योंकि लिस्ट नए सिरे से तैयार की जा रही है।
आपके लिए क्या मायने: नाम कैसे जुड़वाएं या जांचें
इन 17 राज्यों के नागरिक 12 नवंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अपना नाम जरूर जांचें। 1 जनवरी 2027 तक 18 साल पूरे करने वाले युवा Form 6 से अपना नाम जुड़वा सकते हैं। पते में बदलाव या किसी गलती को ठीक कराने के लिए Form 8 भरा जा सकता है। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की आखिरी तारीख 11 दिसंबर 2026 है, इसलिए देरी न करें। सुप्रीम कोर्ट से जुड़े अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी नजर रखना इसलिए जरूरी है, क्योंकि आने वाले दिनों में वोटर लिस्ट का मुद्दा और गरमा सकता है।

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