राम मंदिर दान घोटाले में बड़ा खुलासा! CCTV में 105 बार चोरी, अब कांग्रेस ने मांगी सुप्रीम कोर्ट निगरानी वाली जांच

राम मंदिर दान घोटाला: CCTV फुटेज में 105 बार चोरी कैद

अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मंदिर में दान की चोरी के 105 मामले CCTV कैमरों में कैद हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहाना शामिल थे।

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स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस मामले में लगभग 70,000 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट के मुताबिक, मंदिर में नोटों की गिनती के दौरान चोरी होती थी। 8 आरोपियों — अनुकल्प मिश्रा (मुख्य आरोपी), अविनाश शुक्ल उर्फ शनि, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिनू और सुभाष श्रीवास्तव — को नामजद किया गया है। सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच में अब तक करीब 79.85 लाख रुपये बरामद हुए हैं।

कांग्रेस की मांग: सुप्रीम कोर्ट निगरानी में हो जांच

4 अक्टूबर को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली स्वतंत्र जांच की मांग की। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर चुप्पी साधने और ताकतवर लोगों को बचाने का आरोप लगाया। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब 4 जून को पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय तक वीडियो पहुंच गया और 5 जून को CCTV फुटेज की समीक्षा हो गई, तो FIR दर्ज करने में 25 जून तक का 21 दिन का समय क्यों लगा?

कांग्रेस का कहना है कि CCTV में 105 अलग-अलग चोरी की घटनाएं दर्ज हैं, लेकिन आरोपी सिर्फ 8 बनाए गए और वसूली महज 79.85 लाख रुपये की हुई है — ऐसे में जांच के दायरे और नतीजों पर सवाल उठते हैं। उधर, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कहा था कि चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के जून में इस्तीफे के बाद निष्पक्ष जांच होगी।

चोरी का तरीका: गिनती कक्ष में ही गबन

SIT की चार्जशीट के मुताबिक, दान पेटियों से निकले नोटों की गिनती वाले कमरे में ही हेराफेरी होती थी। CCTV फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, फॉरेंसिक ऑडिट और हजारों मैसेज के आधार पर जांच की गई। प्राथमिक रिपोर्ट में कहा गया था कि 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच संदिग्ध घटनाएं CCTV में कैद हुईं, जिनमें गिनती कर्मचारी नोटों के बंडल छिपाते दिखे।

जांच में यह भी सामने आया कि गिनती कक्ष में प्रवेश-निकास पर कोई तलाशी नहीं होती थी, निजी सामान पर नियंत्रण नहीं था और कई दान पेटियों के नकद एक साथ गिने जाते थे — यही खामियां अपराध को संभव बनाती थीं। गिनती कक्ष से जुड़े बाथरूम से 2.25 लाख रुपये भी बरामद हुए थे।

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने SIT की रिपोर्ट पर संतोष जताया था और मामले की सुनवाई अब एडिशनल सेशन्स जज करेंगे। VHP नेता सुरेंद्र जैन ने कहा कि जांच से साबित हुआ है कि 20,000 करोड़ रुपये की लूट के दावे झूठे थे। वहीं कांग्रेस की मांग अगर जोर पकड़ती है तो मामला कोर्ट की सीधी निगरानी में जा सकता है, जिससे मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता को लेकर देशभर में चल रही बहस और तेज हो जाएगी।