बिहार के सबसे कमजोर नागरिकों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। 13 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को बिहार के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने निर्देश दिया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को खाद्यान्न उनके घर तक पहुंचाया जाए। यानी अब घर में रहने को मजबूर बुजुर्गों और दिव्यांग लाभार्थियों को राशन की दुकान की कतार में नहीं लगना पड़ेगा।
Bihar PDS home delivery का यह निर्देश CMO बिहार के आधिकारिक हैंडल से साझा किया गया। निर्देश में कहा गया कि 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को PDS के तहत खाद्यान्न की होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाए। यह आदेश उन लाभार्थियों को ध्यान में रखकर जारी किया गया है, जिनके लिए शारीरिक अक्षमता के कारण हर महीने राशन की दुकान तक जाना मुश्किल या असंभव होता है।
NFSA 2013 का अधिकार, राज्यों की जिम्मेदारी
भारत का राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 पात्र परिवारों को सब्सिडी वाले खाद्यान्न का कानूनी अधिकार देता है और अंतिम छोर तक डिलीवरी की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर डालता है। हालांकि घर में रहने वाले लाभार्थियों तक पहुंच को ‘समावेशी’ बनाने का काम अब तक केंद्र के आदेश के बजाय राज्यों की पहल पर निर्भर रहा है।
बिहार का यह निर्देश इसी खाई को पाटता है। 80 वर्ष की आयु सीमा और दिव्यांगजन को संरक्षित श्रेणी के रूप में स्पष्ट नाम देकर राज्य ने एक परिभाषित, कार्रवाई योग्य लाभार्थी वर्ग बनाया है। बिहार देश के सबसे बड़े PDS लाभार्थी आबादी वाले राज्यों में है और हाल के वर्षों में राशन कार्ड को आधार से जोड़ने, ई-पीओएस मशीनों और उचित मूल्य की दुकानों के आधुनिकीकरण में निवेश करता रहा है।
क्रियान्वयन ही असली परीक्षा
पिछले एक दशक में कई भारतीय राज्यों ने डोरस्टेप राशन डिलीवरी के पायलट चलाए या विस्तार किया हैं, जिनमें GPS-टैग्ड डिलीवरी वाहन और ई-पीओएस बायोमेट्रिक पुष्टि जैसी तकनीक का इस्तेमाल हुआ। बिहार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के पास पहले के PDS आधुनिकीकरण से बना डिजिटल बुनियादी ढांचा मौजूद है, जिस पर यह निर्देश आगे बढ़ सकता है।
अब असली परीक्षा जिला स्तर पर क्रियान्वयन की होगी — डिलीवरी कर्मियों की तैनाती हो, होम डिलीवरी का रिकॉर्ड रखा जाए और अनाज न पहुंचने पर शिकायत निवारण की व्यवस्था हो। इन तैयारियों का ब्योरा अभी आना बाकी है, लेकिन पटना से आया प्रशासनिक संकेत स्पष्ट है: जब राज्य 80 वर्ष के बुजुर्ग और व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्ति का नाम लेकर निर्देश देता है, तो कल्याण निष्क्रिय अधिकार से सक्रिय दायित्व में बदल जाता है।
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