यूपी में पुराने टैक्स बकायदारों के लिए राहत! ब्याज और जुर्माना माफ — उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 लागू, 3 महीने का मौका

उत्तर प्रदेश में पुराने टैक्स बकाया रखने वाले व्यापारियों और करदाताओं के लिए योगी सरकार ने बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 9 अक्टूबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। इस योजना के तहत विभिन्न कर कानूनों के अंतर्गत 31 दिसंबर 2025 तक सृजित बकायों पर ब्याज और अर्थदंड माफ कर दिया जाएगा। यह छूट तीन महीने तक लागू रहेगी।

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किन कर कानूनों के बकायों पर मिलेगी छूट

योजना का दायरा काफी व्यापक रखा गया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश बिक्री कर अधिनियम-1948, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम-1956, उत्तर प्रदेश आमोद एवं पणकर अधिनियम-1979, उत्तर प्रदेश व्यापार कर अधिनियम-1995, उत्तर प्रदेश प्रवेश कर अधिनियम-2007 और उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम-2008 के अंतर्गत सृजित बकायों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, मनोरंजन कर से संबंधित नियमावली और उत्तर प्रदेश केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमावली-1997 से जुड़े मामलों को भी योजना के दायरे में रखा गया है। यानी GST से पहले के युग के लगभग सभी प्रमुख अप्रत्यक्ष करों के पुराने बकाए इस योजना में कवर होंगे।

Important Dates: तीन महीने का सीमित मौका

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ब्याज और अर्थदंड माफी की यह सुविधा केवल तीन महीने तक उपलब्ध रहेगी। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि निर्धारित तारीख तक सृजित बकायों पर लगने वाले ब्याज और अर्थदंड को माफ करने के लिए यह योजना लागू की जा रही है। इससे संबंधित कर कानूनों के तहत बकाया रखने वाले करदाताओं को राहत मिलने का रास्ता खुलेगा और उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 के जरिए पुराने कर विवादों और बकायों के निपटारण को प्रोत्साहन मिलेगा।

कैसे मिलेगा लाभ

इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र करदाताओं को संबंधित विभाग के कार्यालय में आवेदन करना होगा। आवेदन में बकाया मूलधन की जानकारी देनी होगी, और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने पर ब्याज व अर्थदंड की राशि माफ हो जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह है कि वर्षों से लंबित पुराने कर विवादों का निपटारा हो और राजस्व वसूली में तेजी आए। छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए यह योजना इसलिए भी अहम है, क्योंकि ब्याज और जुर्माने के बढ़ते बोझ के कारण कई बकायदार निपटान से कतरा रहे थे। अब तीन महीने की खिड़की में मूल बकाया चुकाकर वे अपने पुराने मामलों को बंद कर सकेंगे।

सरकार के मुताबिक, इस योजना से हजारों लंबित कर विवादों का निपटारा होगा और राज्य के राजस्व संग्रह में भी सुधार आएगा। बीते वर्षों में भी इस तरह के अमनेस्टी कार्यक्रमों से बकाएदारों को राहत मिली है। व्यापार संगठन भी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि इससे छोटे उद्यमियों का वित्तीय बोझ हल्का होगा।

सरकार ने बकायदारों से अपील की है कि वे इस सीमित अवधि का लाभ उठाकर अपने पुराने कर बकाए का निस्तारण कर लें, क्योंकि छूट की अवधि समाप्त होने के बाद ब्याज और अर्थदंड फिर से लागू हो जाएगा।