ओडिशा के गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी! हर एकड़ पर मिलेगी ₹15,000 की इनपुट सब्सिडी, CM मोहन माझी का बड़ा ऐलान

ओडिशा के गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य के सहकारी चीनी मिलों के दायरे में आने वाले गन्ना किसानों के लिए प्रति एकड़ ₹15,000 की इनपुट सब्सिडी वाली ‘सहकारी चीनी उद्योग क्षेत्रों में गन्ना उत्पादन प्रोत्साहन’ योजना की घोषणा की है। यह घोषणा 5 अक्टूबर 2026 को भुवनेश्वर में ‘संबंध’ नामक सदस्यता अभियान के मंच से की गई।

ताजे अपडेट पाने के लिये हमारे ग्रुप को ज्वाइन करें Join Now

सरकार के मुताबिक, इनपुट सब्सिडी की राशि आने वाले पेराई सीजन से पहले किसानों के खातों में पहुंचाई जाएगी। ओडिशा में गन्ना पेराई का सीजन आम तौर पर नवंबर-दिसंबर में शुरू होकर अगले साल अप्रैल तक चलता है। पिछले कुछ वर्षों में कई सहकारी चीनी मिलों के सामने घाटे और कम गन्ना आपूर्ति की समस्या रही है, क्योंकि किसान कई बार गन्ने के बदले दूसरी फसलों की तरफ रुख कर लेते हैं। इनपुट सब्सिडी से उम्मीद है कि किसान फिर से गन्ने की खेती को प्राथमिकता देंगे और मिलों को पर्याप्त कच्चा माल मिलेगा।

किन किसानों को मिलेगा फायदा

यह सब्सिडी बड़ंबा और आसिका की सहकारी चीनी मिलों के तय कमांड क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों को मिलेगी। ये दोनों मिलें ओडिशा के पुराने चीनी उद्योग केंद्रों में शामिल हैं, और इनके कमांड क्षेत्र के किसानों के लिए यह सब्सिडी गन्ने की खेती को फिर से आकर्षक बनाने की कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है। किसानों को अपनी पात्रता की जानकारी स्थानीय सहकारी समिति या मिल प्रशासन से लेनी होगी। सब्सिडी और बीज वितरण की पूरी प्रक्रिया सहकारी समितियों के माध्यम से ही होगी, ताकि लाभ सीधे पंजीकृत किसानों तक पहुंचे और बिचौलियों की भूमिका कम से कम रहे।

‘संबंध’ अभियान और बेहतर बीज किस्में

यह घोषणा राज्यभर की प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) और बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों (LAMPCS) के लिए शुरू किए गए ‘संबंध’ सदस्यता अभियान के मंच से की गई। इस अभियान का सीधा मकसद ज्यादा से ज्यादा किसानों को इन सहकारी ढांचों से जोड़ना है। सरकार के मुताबिक राज्य में 500 से ज्यादा सहकारी समितियों के जरिये 8 लाख से अधिक किसानों को वर्ष 2024-25 के लाभांश वितरण का फायदा मिलेगा। गन्ना किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी के साथ ही अधिक चीनी मात्रा वाली गन्ने की बेहतर बीज किस्में भी उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जिससे मिलों की चीनी रिकवरी दर में सुधार हो सके। ज्यादा रिकवरी दर का सीधा फायदा मिल और किसान दोनों को मिलता है, क्योंकि गन्ने की कीमत भी उसकी चीनी मात्रा से जुड़ी होती है।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सहकारी संस्थाओं से राजनीतिक विचारों से ऊपर उठकर कृषि समुदाय को समर्थन देने की अपील की। कार्यक्रम में धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹3,100 प्रति क्विंटल का भी जिक्र हुआ। सरकार के अनुसार, ‘संबंध’ अभियान सिर्फ गन्ना किसानों तक सीमित नहीं है — इसके जरिये धान, तिलहन और दलहन उत्पादक किसानों को भी सहकारी ढांचे से जोड़ने की कोशिश होगी, जिससे खाद-बीज खरीद और उपज की बिक्री दोनों में किसानों को फायदा मिलेगा।