मुरादाबाद-पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से दिलचस्प रही है। मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट भी इसी सियासी हलचल का एक अहम केंद्र है। जैसे-जैसे ठाकुरद्वारा विधानसभा 2027 चुनाव की आहट करीब आ रही है, वैसे-वैसे सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि इस बार जनता किस पर मेहरबान होगी।
दरअसल, पिछले 20 सालों का इतिहास पलटकर देखें तो इस सीट ने राजनीति के कई बदलते हुए रंग देखे हैं। कभी यहां कमल खिला, कभी हाथी चिंघाड़ा तो पिछले एक दशक से यहां लगातार साइकिल दौड़ रही है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि इस वीआईपी सीट का मिजाज पिछले दो दशकों में कैसे बदला है और कौन सी पार्टी यहां असल में जनता की नब्ज पकड़ने में कामयाब रही है।
पिछले 20 साल में ठाकुरद्वारा सीट किसके पास रही?
| चुनाव वर्ष | विजेता | पार्टी |
|---|---|---|
| 2002 | कुंवर सर्वेश कुमार | भाजपा |
| 2007 | विजय कुमार यादव | बसपा |
| 2012 | कुंवर सर्वेश कुमार | भाजपा |
| 2014 (उपचुनाव) | नवाब जान | समाजवादी पार्टी |
| 2017 | नवाब जान | समाजवादी पार्टी |
| 2022 | नवाब जान | समाजवादी पार्टी |
इन आंकड़ों से साफ दिखता है कि पिछले लगभग 20 वर्षों में सीट पर तीन बड़े राजनीतिक चरण देखने को मिले— भाजपा का दौर, बसपा का उभार और फिर समाजवादी पार्टी की लगातार बढ़ती पकड़।
ठाकुरद्वारा विधानसभा 2027: चुनावी बिसात पर तीन बड़े दौर अगर हम साल 2002 से लेकर अब तक के आंकड़ों पर गहराई से नजर डालें, तो ठाकुरद्वारा का सियासी सफर तीन बड़े चरणों में बंटा हुआ नजर आता है। पहले दौर में भारतीय जनता पार्टी का साफ दबदबा देखने को मिला था। साल 2002 में कुंवर सर्वेश कुमार ने भाजपा के टिकट पर शानदार जीत हासिल की थी और उस वक्त पार्टी को लगभग 46% वोट मिले थे।
असल में, कुंवर सर्वेश सिंह का नाम ठाकुरद्वारा की सियासत में एक बड़े चेहरे के तौर पर लिया जाता रहा है। हालांकि, 2007 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की लहर ने इस सीट का समीकरण पूरी तरह से बदल दिया और विजय कुमार यादव ने यहां से बड़ी जीत दर्ज की। लेकिन यह बदलाव ज्यादा लंबा नहीं टिक सका। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर जोरदार वापसी की और कुंवर सर्वेश कुमार ने करीब 38% वोट शेयर के साथ यह सीट वापस अपनी झोली में डाल ली।
जब हाथी ने छोड़ी जमीन और शुरू हुआ साइकिल का राज बताया जा रहा है कि 2012 के बाद से ही इस इलाके के राजनीतिक समीकरणों में अंदरूनी तौर पर बड़ा बदलाव आना शुरू हो गया था। असली खेल साल 2014 के उपचुनाव में हुआ, जिसने इस सीट की पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी।
2014 के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के नवाब जान ने जबर्दस्त जीत दर्ज की और एक नए सियासी युग की शुरुआत की। इसके बाद से सपा ने यहां कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 2017 की लहर में भी नवाब जान ने अपना किला मजबूती से बचाए रखा और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जीत की शानदार हैट्रिक लगा दी। वहीं बसपा, जो कभी यहां नंबर एक की कुर्सी पर थी, वह धीरे-धीरे खिसक कर हाशिए पर चली गई।
2022 के आंकड़े क्या इशारा कर रहे हैं? पिछले चुनाव यानी 2022 के आंकड़ों को देखें तो ठाकुरद्वारा में लड़ाई पूरी तरह से सपा और भाजपा के बीच सिमट चुकी है। 2022 में समाजवादी पार्टी को 1,34,391 वोट (48.76%) मिले थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 1,14,707 (41.62%) लोगों का समर्थन मिला था।
वहीं, बहुजन समाज पार्टी महज 22,163 वोटों (8.04%) पर सिमट कर रह गई। जीत का अंतर करीब 19,684 वोटों का रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह आंकड़े साफ गवाही देते हैं कि मुकाबला बेहद कांटे का था और जीत-हार में ध्रुवीकरण ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
अब ठाकुरद्वारा का ऊंट किस करवट बैठेगा? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले चुनाव में क्या होगा। क्या समाजवादी पार्टी अपनी लगातार चौथी जीत दर्ज कर पाएगी या फिर भाजपा अपने पुराने गढ़ को वापस छीनने में कामयाब होगी? राजनीतिक जानकारों की मानें तो चुनाव पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टियां किस उम्मीदवार पर दांव लगाती हैं। संगठन की मजबूती और मतदान का प्रतिशत ही यह तय करेगा कि पश्चिमी यूपी की इस अहम सीट पर कौन बाजी मारता है।

Bhudev Bhagaliya is an experienced and senior journalist who has carved a distinct niche for himself in the world of Hindi journalism through his profound understanding and precise writing style. With over two decades of experience in the field of journalism, he has held key responsibilities at Dainik Hindustan for 12 years and at Amar Ujala for one year. Currently, he serves as the Content Editor for the Jagrook Youth News newspaper and portal, where he plays a crucial role in ensuring the quality and credibility of the news content. Bhudev Bhagaliya consistently writes about issues that help raise awareness within society and among the younger generation.