2011 वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा को बाहर करना थी सबसे बड़ी भूल, 15 साल बाद पूर्व चीफ सिलेक्टर ने मांगी माफी

खेल डेस्क/नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा कप्तान और दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में शुमार ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा के शानदार करियर में साल 2011 का वनडे वर्ल्ड कप एक ऐसा गहरा घाव है, जिसकी टीस उन्हें आज भी महसूस होती है। एमएस धोनी की कप्तानी में भारत ने 28 साल बाद वह विश्व कप जीता था, लेकिन रोहित शर्मा उस ऐतिहासिक टीम का हिस्सा नहीं बन पाए थे। अब, करीब 15 साल बाद उस समय की चयन समिति के अध्यक्ष रहे कृष्णमाचारी श्रीकांत (Krishnamachari Srikkanth) ने रोहित शर्मा को टीम से बाहर रखने के फैसले पर गहरा पछतावा जताया है और सार्वजनिक रूप से उनसे माफी मांगी है।

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श्रीकांत ने माना- “वह मेरी सबसे बड़ी गलती थी”

हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व चीफ सिलेक्टर के. श्रीकांत ने 2011 विश्व कप के टीम चयन को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बेहद भावुक होते हुए स्वीकार किया कि उस समय रोहित शर्मा को 15 सदस्यीय स्क्वॉड में शामिल न करना उनकी और चयन समिति की एक बड़ी भूल थी।

  • श्रीकांत ने कहा कि जब भी वह रोहित शर्मा की आज की उपलब्धियों और उनके खेल को देखते हैं, तो उन्हें उस फैसले पर बहुत अफसोस होता है।
  • उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह मानते हुए कि उस वक्त रोहित बेहतरीन फॉर्म में थे और टीम में जगह पाने के हकदार थे, रोहित शर्मा से माफी मांगी।

रोहित के लिए टूट गया था सपना

साल 2011 में जब भारत की मेजबानी में विश्व कप खेला जा रहा था, तब रोहित शर्मा टीम में जगह बनाने के प्रबल दावेदारों में से एक थे। लेकिन अंतिम समय में चयनकर्ताओं ने उनकी जगह पीयूष चावला और अन्य खिलाड़ियों को तरजीह दी थी। टीम से बाहर होने के बाद रोहित शर्मा ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा था कि विश्व कप टीम का हिस्सा न बन पाना उनके लिए एक बड़ा झटका है और उन्हें इस बात से उबरने में समय लगेगा।

निराशा को बनाया ताकत, आज हैं क्रिकेट के ‘हिटमैन’

2011 विश्व कप से बाहर होने के झटके ने रोहित शर्मा को तोड़कर रख दिया था, लेकिन उन्होंने इस निराशा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।

  • 2013 में एमएस धोनी ने जब उन्हें बतौर ओपनर आजमाया, तो उसके बाद रोहित ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
  • आज वह न केवल भारतीय टीम के कप्तान हैं, बल्कि वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक जड़ने वाले दुनिया के इकलौते बल्लेबाज भी हैं।

श्रीकांत का यह बयान इस बात का सबूत है कि क्रिकेट में समय कैसे बदलता है और एक खिलाड़ी अपनी मेहनत से आलोचकों और चयनकर्ताओं दोनों के फैसले को कैसे गलत साबित कर सकता है।