Rohit sharma-भारतीय क्रिकेट के दो सबसे बड़े सुपरस्टार विराट कोहली और रोहित शर्मा के वनडे रिटायरमेंट के बाद से टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया की हालत खस्ता होती जा रही है। पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने साफ-साफ कहा है कि इन दोनों दिग्गजों के वनडे से संन्यास लेने का सीधा असर टेस्ट टीम की स्थिरता पर पड़ा है। जी हां, आपने सही सुना – जो खिलाड़ी सालों तक तीनों फॉर्मेट में देश का नाम रोशन करते थे, अब उनका एक फॉर्मेट छोड़ना ही टीम के लिए मुसीबत बन गया है।
तीनों फॉर्मेट खेलने से मिलती थी मानसिक मजबूती
आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर खुलकर बात की। उनका कहना है कि जब कोई खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट खेलता है तो उसका दिमाग हमेशा क्रिकेट में डूबा रहता है। साल भर क्रिकेट, प्रैक्टिस, फिटनेस और मैच – इससे खिलाड़ी की मानसिक और तकनीकी तैयारी हमेशा टॉप लेवल पर रहती है। लेकिन जैसे ही रोहित और कोहली ने वनडे से संन्यास लिया, उनके दिमाग में अचानक खालीपन आ गया। अब वे सिर्फ टेस्ट और टी20 खेल रहे हैं। बीच में लंबे-लंबे गैप आ गए। नतीजा? टेस्ट मैचों में फोकस और कॉन्सन्ट्रेशन में कमी दिख रही है।
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में मिली करारी शिकस्त
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चल रही बॉर्डर-गावस्कर सीरीज इसका जीता-जागता सबूत है। पर्थ में पहला टेस्ट हारा, एडिलेड में दिन-रात का टेस्ट बुरी तरह हारे और अब मेलबर्न में भी टीम लड़खड़ा रही है। आकाश चोपड़ा ने कहा कि पहले जहां कोहली और रोहित पूरे साल क्रिकेट के मूड में रहते थे, अब लंबे ब्रेक के बाद सीधे टेस्ट खेलने आ रहे हैं। लाल गेंद से खेलने का रिदम ही बिगड़ गया है। यही वजह है कि बड़े-बड़े खिलाड़ी भी सस्ते में आउट हो रहे हैं।
क्या सिर्फ कोहली-रोहित ही जिम्मेदार?
हालांकि कई फैंस और एक्सपर्ट इसे पूरी तरह कोहली-रोहित का दोष नहीं मानते। कुछ लोग कह रहे हैं कि टीम में युवा खिलाड़ियों को मौका देने का सही तरीका नहीं अपनाया गया। शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल और ऋषभ पंत जैसे युवा तो हैं, लेकिन अभी वे उस लेवल पर नहीं पहुंचे जहां कोहली-रोहित सालों तक रहे। मिडिल ऑर्डर में स्थिरता की कमी साफ दिख रही है। केएल राहुल भी लगातार फ्लॉप हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ दो खिलाड़ियों के एक फॉर्मेट छोड़ने से पूरी टेस्ट टीम हिल गई?
बीसीसीआई और सिलेक्शन कमेटी पर भी सवाल
आकाश चोपड़ा ने साफ कहा कि जब दो सबसे बड़े खिलाड़ी एक फॉर्मेट छोड़ते हैं तो बोर्ड और सिलेक्शन कमेटी को पहले से प्लान करना चाहिए था। ट्रांजिशन पीरियड इतना खराब कभी नहीं होना चाहिए था। अब लग रहा है कि टीम इंडिया 3-0 या 4-1 से सीरीज हार सकती है, जो पिछले 10 साल में घर के बाहर ऑस्ट्रेलिया से सबसे बड़ी हार होगी। फैंस का गुस्सा सोशल मीडिया पर साफ दिख रहा है। कोई कोहली-रोहित को जिम्मेदार ठहरा रहा है तो कोई गौतम गंभीर और अजित अगरकर की जोड़ी को कोस रहा है।
आगे क्या? नया कप्तान, नई रणनीति?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे क्या होगा? क्या रोहित शर्मा टेस्ट कप्तानी भी छोड़ देंगे? क्या जसप्रीत बुमराह को परमानेंट कप्तान बनाया जाएगा? या फिर शुभमन गिल को तैयार किया जाएगा? जो भी हो, भारतीय क्रिकेट के लिए यह बहुत बड़ा सबक है कि दो खिलाड़ियों पर इतनी निर्भरता कभी नहीं रखनी चाहिए। अब वक्त है नए युग की शुरुआत का, लेकिन यह शुरुआत बहुत दर्द भरी हो रही है। फैंस बस यही दुआ कर रहे हैं कि टीम जल्दी संभले और 2025-27 के नए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप साइकिल में वापसी करे।
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