CEC ज्ञानेश कुमार के ‘इस्तीफे’ की वायरल चिट्ठी निकली फर्जी! चुनाव आयोग ने बताईं 5 बड़ी खामियां, जानिए पूरी सच्चाई

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक चिट्ठी जमकर वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को संबोधित इस पत्र में कुमार के कथित हस्ताक्षर भी दिखाए गए हैं। लेकिन चुनाव आयोग ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए पत्र को पूरी तरह फर्जी करार दिया है।

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चुनाव आयोग ने क्या कहा?

निर्वाचन आयोग के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार अपने संवैधानिक पद पर पूरी तरह बने हुए हैं और आयोग की सभी बैठकें व कामकाज सामान्य रूप से जारी हैं। आयोग ने जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और जब तक आधिकारिक पुष्टि न हो, इन्हें आगे शेयर करने से बचें।

फर्जी चिट्ठी में मिलीं ये 5 बड़ी खामियां

वायरल पत्र की जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं:

  1. तारीखों का बेमेल: पत्र के मजमून में वर्ष 2025 का जिक्र है, जबकि नीचे तारीख 25 September, 2026 दर्ज है। किसी आधिकारिक सरकारी पत्राचार में ऐसा बेमेल संभव नहीं।
  2. निरस्त कानून का हवाला: पत्र में इस्तीफे के लिए 1991 के पुराने कानून का हवाला दिया गया है, जबकि केंद्र सरकार उसे निरस्त कर 2023 का नया कानून लागू कर चुकी है।
  3. फॉन्ट और फॉर्मेट की खामियां: फॉन्ट का आकार, एलाइनमेंट और स्पेसिंग चुनाव आयोग के आधिकारिक प्रारूप से मेल नहीं खाते। यह किसी साधारण वर्ड या PDF एडिटर में लेटरहेड की तस्वीर पर टेक्स्ट बैठाकर बनाया गया लगता है।
  4. आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं: CEC का इस्तीफा बड़ा संवैधानिक घटनाक्रम होता है, जिसकी अधिसूचना राष्ट्रपति भवन, कानून मंत्रालय या eci.gov.in पर तुरंत जारी होती है। कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
  5. PIB पर कोई पुष्टि नहीं: पत्र सूचना कार्यालय (PIB) समेत किसी भी आधिकारिक मंच पर इस इस्तीफे की कोई पुष्टि मौजूद नहीं है।

SIR विवाद है असली पृष्ठभूमि

यह अफवाह ऐसे समय फैली है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्तों एस.एस. संधू तथा विवेक जोशी के बीच कथित मतभेद की खबरें आई थीं। इसके बाद विपक्ष CEC के इस्तीफे की मांग कर रहा था। आयोग ने हालांकि बताया था कि SIR से जुड़े सभी आदेश तीनों आयुक्तों की मंजूरी के बाद ही जारी किए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि देश की इतनी बड़ी संवैधानिक संस्था के शीर्ष अधिकारी को लेकर झूठी खबरें फैलाना बेहद गंभीर मामला है। खबर शेयर करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि जरूर करें।