उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्या मामले ने एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियां बटोर ली हैं। Ankita Bhandari के माता-पिता — वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी — बुधवार को दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठे थे। रातभर चले धरने के बाद गुरुवार तड़के करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने उन्हें और कुछ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया। करीब एक घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। माता-पिता की मांग है कि सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्त कथित VIP की नियुक्ति पर तब तक रोक लगाई जाए, जब तक CBI जांच पूरी नहीं हो जाती।
कथित VIP की नियुक्ति पर बवाल क्यों?
दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को बीजेपी के वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया था। अंकिता के माता-पिता ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि यही कथित VIP हैं, जिनका नाम इस मामले में जुड़ा रहा है। उनकी मांग है कि जब तक CBI इस कथित VIP एंगल की जांच पूरी नहीं कर लेती, तब तक नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। यहां यह साफ करना जरूरी है कि ये आरोप अभी तक अदालत में साबित नहीं हुए हैं। दुष्यंत कुमार गौतम ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे दुष्प्रचार बताया है और मानहानि का केस भी दर्ज कराया है।
रातभर धरना, सुबह हिरासत — मां बोलीं, राष्ट्रपति से अपील
धरने के दौरान अंकिता की मां सोनी देवी फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने राष्ट्रपति से अपील करते हुए कहा कि वह स्वयं एक महिला हैं और एक मां की पीड़ा जरूर समझेंगी। पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने भी कहा कि जब तक CBI जांच पूरी नहीं होती, नियुक्ति पर रोक लगनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना भी परिवार के साथ धरने पर बैठी थीं। देर रात लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी धरना स्थल पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाया।
दिल्ली पुलिस ने तड़के धरने पर बैठे माता-पिता और कई कांग्रेस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि इंसाफ मांगने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। माता-पिता ने चेतावनी भी दी है कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो वह उत्तराखंड सचिवालय, देहरादून में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठेंगे और राष्ट्रपति से मिलने का समय भी मांगा है।
धामी सरकार का जवाब — सजा दिलाई, CBI जांच कराई
धरने के बीच पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भी अपना पक्ष रखा है। राज्य सरकार के बयान के मुताबिक, मामले में दोषियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेजा गया, निष्पक्ष जांच के लिए SIT बनाई गई और गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई। करीब 500 पन्नों की चार्जशीट में 100 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सरकार का कहना है कि दोषियों की जमानत अर्जियां बार-बार खारिज हुईं और आखिरकार मई 2025 में कोटद्वार कोर्ट ने रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई — तीनों दोषी फिलहाल उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। बयान में यह भी कहा कि परिवार की मांग पर ही प्रॉसिक्यूटर तीन बार बदले गए, CBI जांच के आदेश खुद मुख्यमंत्री धामी ने दिए, परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद और पिता-भाई को सरकारी नौकरी भी दी गई।
मामले की पृष्ठभूमि — चार साल पुराना जख्म
अंकिता भंडारी (19), पौड़ी गढ़वाल के वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं। सितंबर 2022 में वह लापता हुई थीं और 24 सितंबर 2022 को उनका शव मिला था। मामले ने पूरे उत्तराखंड को हिलाकर रख दिया था। कथित VIP एंगल तब चर्चा में आया, जब कथित ऑडियो क्लिप्स वायरल हुईं। अब CBI इस एंगल की जांच कर रही है, और जब तक जांच पूरी नहीं होती, परिवार ने न्याय की लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है।
इस मामले से जुड़े अपडेट और न्याय से जुड़ी अन्य खबरों में CJI सूर्य कांत विवाद पर SCBA-SCAORA की एकजुट प्रतिक्रिया भी चर्चा में रही थी, जबकि ब्रेकिंग बैड के RJ Mitte के निधन की खबर ने दुनियाभर के फैन्स को स्तब्ध कर दिया था।

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