t20 world cup 2026-क्रिकेट की दुनिया में एक कहावत बहुत मशहूर है कि कप्तान उतना ही अच्छा होता है, जितनी अच्छी उसकी टीम होती है। लेकिन क्या सच में सिर्फ टीम का अच्छा होना ही काफी है? या फिर किस्मत यानी लक का भी कोई बड़ा खेल होता है?
आज हम इसी दिलचस्प सवाल पर बात करेंगे। एक तरफ हैं रोहित शर्मा, जिन्होंने 2024 में भारत का वो सपना पूरा किया जिसका इंतज़ार हम बरसों से कर रहे थे। और दूसरी तरफ हैं हमारे नए टी-20 कप्तान, सूर्यकुमार यादव, जिन्हें देखकर लगता है कि वो मिट्टी को भी छू लें तो वो सोना बन जाती है। तो सवाल यह हैकृक्या सूर्या, रोहित शर्मा से भी ज्यादा लकी साबित हो रहे हैं?
सबसे पहले बात करते हैं रोहित शर्मा की। लोग अक्सर कहते हैं कि रोहित बहुत लकी कप्तान हैं। और क्यों न कहें? उनके पास 5 आईपीएल ट्रॉफी थीं जब वो भारतीय टीम के कप्तान बने। लेकिन दोस्तों, क्या यह सिर्फ किस्मत थी? ज़रा 2023 का वनडे वर्ल्ड कप याद कीजिए। टीम इंडिया लगातार 10 मैच जीती। वो कोई तुक्का नहीं था, वो रोहित शर्मा का निडर होकर खेलने का तरीका था। हां, फाइनल में शायद किस्मत ने साथ नहीं दिया, लेकिन 2024 के टी-20 वर्ल्ड कप में उन्होंने हिसाब बराबर कर दिया।
बारबाडोस का वो फाइनल याद है? जब मैच हाथ से निकल रहा था। उस वक्त रोहित ने घबराने की जगह बुमराह को गेंद थमाई और मैच का पासा पलट दिया। रोहित शर्मा लकी इसलिए नहीं हैं कि वो टॉस जीतते हैं, वो लकी इसलिए हैं क्योंकि वो सही समय पर सही फैसला लेना जानते हैं। वो किस्मत के भरोसे नहीं बैठते, वो अपनी किस्मत खुद लिखना जानते हैं।
अब आते हैं हमारे नए कप्तान, सूर्यकुमार यादव यानी श्स्काईश् पर। रोहित के बाद जब सूर्या को कमान मिली, तो सबको लगा कि रोहित की जगह भरना बहुत मुश्किल होगा। लेकिन सूर्या ने इसे बहुत ही आसानी से संभाल लिया। क्या आपको श्रीलंका के खिलाफ वो मैच याद है? जहां भारत लगभग हार चुका था। वहां सूर्या ने कोई बड़ा गेंदबाज नहीं, बल्कि खुद को और रिंकू सिंह को गेंदबाजी पर लगा दिया। और नतीजा क्या हुआ? भारत वो हारा हुआ मैच जीत गया।
इसे कहते हैं श्बहादुरों का लकश्। सूर्या एक ऐसे कप्तान हैं जो अपने दिल की सुनते हैं। वो रिस्क लेने से डरते नहीं हैं, और अक्सर किस्मत भी उसी का साथ देती है जो निडर होता है। सूर्या के चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान रहती है, जिससे टीम पर दबाव नहीं आता। चाहे टॉस हार जाएं, लेकिन मैच जीतना उन्हें आता है।
तो असली फैसला क्या है? कौन ज्यादा लकी है?
देखिए, रोहित शर्मा एक ऐसे कप्तान हैं जो अपने अनुभव और दिमाग से मैच जीतते हैं। उनकी किस्मत उनकी मेहनत में छिपी है। वहीं, सूर्यकुमार यादव एक ऐसे कप्तान हैं जो अपनी बेफिक्री और हिम्मत से मैच का रुख बदल देते हैं। रोहित अब एक लेजेंड बन चुके हैं, जबकि सूर्या अभी अपनी कहानी लिख रहे हैं।
सच तो यह है कि असली लकी तो हम क्रिकेट फैंस हैं। हमें पहले धोनी मिले, फिर विराट, फिर रोहित और अब सूर्या जैसा कप्तान मिला है। भारतीय क्रिकेट बिल्कुल सुरक्षित हाथों में है।
अब आप हमें बताइए, आपको क्या लगता है? क्या 2026 के वर्ल्ड कप में सूर्या अपनी कप्तानी और किस्मत से भारत को दोबारा चौंपियन बना पाएंगे?

भूदेव भगलिया एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने हिंदी पत्रकारिता की दुनिया में अपनी गहरी पकड़ और सटीक लेखन शैली से अलग पहचान बनाई है। पत्रकारिता के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक अनुभव के साथ, भूदेव जी ने दैनिक हिंदुस्तान में 12 वर्षों तक और अमर उजाला में एक वर्ष तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। वर्तमान में वे जागरूक यूथ न्यूज़ अखबार एवं पोर्टल में कंटेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं, जहाँ वे न्यूज़ कंटेंट की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भूदेव भगलिया हमेशा उन मुद्दों पर कलम उठाते हैं जो समाज और युवा पीढ़ी को जागरूक करने में सहायक हों।
